ईवीएम की बजाए बैलट पेपर से चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला


ballot paper or evm
Ballot Paper or EVM



सन 2014 लोक सभा चुनाव के बाद से ईवीएम हटा करके बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग बहुत तेजी पर है. बैलट पेपर की मांग वर्तमान सरकार की विपक्षी पार्टियों के द्वारा की जा रही है जिनमें सपा बसपा और कांग्रेस मुख्य रूप से सामने आते हैं|

क्या है मांग? चुनाव आयोग ने क्या कहा?

मांग की जा रही है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है और इसलिए उसे बैंकर के बैलेट पेपर से चुनाव कराने चाहिए| परंतु चुनाव आयोग ने सामूहिक रूप से प्रयोग करा कर के सिद्ध किया है ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता और अगर ईवीएम में कोई गड़बड़ होती है तो पोलिंग बूथ पर उस ईवीएम को लगाया ही नहीं जाता|


सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका था और वहां पर भी बैलट पेपर लागू करने की मांग की गई लेकिन पुराने और आज के आंकड़ों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया| 

अभी हाल ही में बंगाल में नगर पंचायत चुनाव में जिस प्रकार से टीएमसी पार्टी के लोगों ने पोलिंग बूथ पर कब्जा करके अपनी पार्टी के पक्ष में खुद ही बैलट पेपर पर मोहर लगाकर बॉक्स भर लिया था| उसे देखते हुए और उस जैसी अनगिनत घटनाओं के वजह से बैलट पेपर को मान्यता देने की मनाही कर दी गई|

ममता बनर्जी के राज्य में हुई इस घटना की वजह से दूसरी पार्टियों की भी सुनवाई नहीं हो पा रही है जिसके जिम्मेदार टीएमसी पार्टी और ममता बनर्जी हैं जिन्होंने नगर पंचायत चुनाव जीतने के लिए इस लोकतंत्र की हत्या करने वाली घिनौनी घटना को अंजाम दिया| इससे बैलट पेपर पर शक बढ़ गया और याचिका नहीं सुनी गई|

वैसे जिस प्रकार बैलट पेपर की मांग दमखम से राजनीतिक पार्टियों द्वारा की जा रही है उसे देखकर लगता है कि भविष्य में बैलट पेपर फिर से जारी हो जाएगा|

बैलट पेपर सुरक्षित नहीं

बैलट पेपर को सुरक्षित इसलिए नहीं माना जाता क्योंकि अभी तक के रिकॉर्ड्स में देखा गया है कि क्षेत्र के नेता लोग अपने व्यक्ति लगाकर के पोलिंग बूथ पर कब्जा कर लेते हैं और फिर मनचाहे बैलट पेपर भर के चुनाव जीत जाते हैं|

परंतु ईवीएम में ऐसा करना नामुमकिन है क्योंकि ईवीएम एक निश्चित समय के लिए एक निश्चित मात्रा में ही वोट एक्सेप्ट करता है| इस चीज की जानकारी राजनीतिक पार्टियों को होती है इसलिए वह ईवीएम पर कब्जा करके वोटिंग दिलाने की चेष्टा ही नहीं करते|

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