पहले मायावती और अब अखिलेश ने दिया कांग्रेस को झटका, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जरूरत नहीं


कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के सपनों को कोई ना कोई नेता लात मार कर चला जा रहा है| वजह है राहुल गांधी का कोई भी अस्तित्व नहीं है राजनीति में| कोई भी अच्छी छवि ना होने के कारण उन्हें राजनीति के पुराने धुरंधर अपने साथ शामिल करने में अच्छा महसूस नहीं करते|

मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जरूरत नहीं


जैसा की सभी जानते हैं कि गांधी परिवार के होने के कारण राहुल गांधी को विरासत में कांग्रेस की गद्दी मिली हुई है लेकिन देश की गद्दी विरासत में नहीं मिलती उसके लिए जनता का भरोसा जीतना पड़ता है| मेहनत करनी पड़ती है लोगों की भलाई करनी पड़ती है| तब जाकर कई वर्षों में एक छवि बन कर आती है और बिना उसे छवि के अगर आप देश की सत्ता के मुखिया बनना चाहेंगे तो यह संभव नहीं|

गांधी परिवार हमेशा से घमंड में चूर परिवार माना गया है इसका सबूत राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाना भी है| राहुल गांधी के पास कोई योग्यता नहीं लेकिन कांग्रेस में और भी अच्छे नेता थे जो राहुल गांधी से सौ गुना ज्यादा योग्यता रखने वाले हैं फिर भी उन्हें अध्यक्ष के लिए नहीं चुना गया|

यह सब तो हो ही रहा था लेकिन राहुल गांधी यानी कांग्रेस के द्वारा बनाए गए महागठबंधन के हिस्सेदार दल में से पहले मायावती ने कांग्रेस को झटका दिया और कांग्रेस को बल हीन बताया, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में "यूपी को साथ पसंद है" का स्लोगन देकर राहुल गांधी के साथ गठजोड़ करने वाले फिर बुरी तरह से हार जाने वाले नेता अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी को झटका  दे दिया|

कांग्रेस पार्टी को लगाते हुए, अखिलेश यादव ने कहा कि हमने बहुत इंतजार किया, अब हम और इंतजार नहीं कर सकते. हमारी BSP से बात चल रही है लेकिन हम कांग्रेस के लिए इंतजार नहीं कर सकते. कोई भी राजनीति में इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकता और हम तो बिल्कुल नहीं क्योंकि हम कोई बेचारा पार्टी नहीं हम बेचारे नहीं है. भले ही हम मध्य प्रदेश में कुछ छोटी पार्टी हो लेकिन हम चौथे नंबर पर आते हैं.

आपको आश्चर्य होगा कि यह सब कहने वाले अखिलेश यादव लगभग एक सप्ताह पहले अलग ही बयान दे रहे थे.

अखिलेश यादव कहते थे "मुझे नहीं पता कांग्रेस ने क्या कहा है लेकिन कांग्रेस एक अच्छी पार्टी है बस सब कुछ समझते हैं लेकिन मुझे पता है कि बहुजन समाज पार्टी किसी के दबाव या प्रभाव में आकर के यह निर्णय नहीं ले रही."

कुछ समय पहले तक अखिलेश यादव मध्य प्रदेश चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते थे लेकिन एकदम सुर बदलते हुए अखिलेश यादव ने कांग्रेस पार्टी पर हथोड़ा चला दिया| वैसे एक बात आपको और बताना चाहेंगे कि इस चुनाव में राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है खींचातानी में एक बार बीजेपी फिर से मध्य प्रदेश में सत्ता हासिल करेगी क्योंकि वहां की जनता का समर्थन बीजेपी को सबसे ज्यादा है|