शुक्रवार, 6 जुलाई 2018


 फिल्मों की दुनिया आवाज और सबसे अलग नजरिए वाले डायलॉग से ख्याति पाने वाले राजकुमार को आप जरुर जानते होंगे जब भी कोई गलती से भी "जानी" कहता है तो इनका नाम हर जुबां पर होता है क्योंकि इन शब्दों में अपनी रजिस्ट्री जैसी करवा रखी है| आज हम राजकुमार के ऐसे सुपरहिट डायलॉग बताएंगे जिनको सुनकर दुश्मन शर्म से मर जाता है|

दुश्मन की कलेजे में आग लगाने वाले डायलॉग

इनके दुश्मनों के लिए बोले गए डायलॉग दुश्मनों को जलाकर तो रखी देते थे अरे तभी तो इतने विख्यात थे डायलॉग सम्राट राजकुमार|


आवाज के माहिर और डायलॉगबाजी में सबसे ज्यादा विख्यात होने वाले राजकुमार क सामने जब दुश्मन से होता था तो उसे मारने से पहले उसे डायलॉग से ही मार दिया करते थे उनके डायलॉग सुनकर दुश्मनों के कलेजे में आग लग जाती थी उनका सोचना समझना तक बंद हो जाता था कि अब वह क्या बोलें क्योंकि राजकुमार कुछ कहते ही ऐसा थे|



राजस्थान में हमारी भी ज़मीनात हैं. और तुम्हारी हैसियत के जमींदार,
हर सुबह हमें सलाम करने, हमारी हवेली पर आते रहते हैं.

– राजपाल चौहान, सूर्या (1989)

जिसके दालान में चंदन का ताड़ होगा वहां तो सांपों का आना-जाना लगा ही रहेगा.
– पृथ्वीराज, बेताज बादशाह (1994)


हमने देखें हैं बहुत दुश्मनी करने वाले, वक्त की हर सांस से डरने वाले. जिसका हरम-ए-ख़ुदा,
कौन उसे मार सके, हम नहीं बम और बारूद से मरने वाले.
 – साहब बहादुर राठौड़, गॉड एंड गन (1995)

हम कुत्तों से बात नहीं करते.
– राणा, मरते दम तक (1987)

 अगर सांप काटते ही पलट जाए, तो उसके ज़हर का असर होता है वरना नहीं. हम सांप को काटने की इजाज़त तो दे सकते हैं लेकिन पलटने की इजाज़त नहीं देते .
– पृथ्वीराज, बेताज बादशाह (1994)

राजा के ग़म को किराए के रोने वालों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी चिनॉय साहब.
– राजा, वक्त (1965)



शेर को सांप और बिच्छू काटा नहीं करते..
दूर ही दूर से रेंगते हुए निकल जाते हैं.
– राजेश्वर सिंह, सौदागर (1991)


सॉलिड डायलॉग जिनका कोई सानी नहीं


 राजकुमार की जवाब एकदम लाजवाब होते थे ऐसे जवाब देने के बाद वह लोगों के होश उड़ा दिया करते थे सामने वाले को समझ में ही नहीं आता था कि अब आगे क्या किया जाए राजकुमार की बातों से हर कोई प्रभावित होता था यूं समझिए किसी भी फिल्म में अगर राजकुमार है तो उनकी बाकि एक्टिंग के अलावा लोग उनके डायलॉग पर ज्यादा ध्यान देते थे|  इसीलिए ने लाजवाब डायलॉग देने वाला शहंशाह माना गया|


घर का पालतू कुत्ता भी जब कुर्सी पर बैठ जाता है तो उसे उठा दिया जाता है. इसलिए क्योंकि कुर्सी उसके बैठने की जगह नहीं. सत्य सिंह की भी यही मिसाल है. आप साहेबान ज़रा इंतजार कीजिए.


- साहब बहादुर राठौड़, गॉड एंड गन (1995)

तुमने सुना होगा तेजा कि जब सिर पर बुरे दिन मंडराते हैं तो ज़बान लंबी हो जाती है.
 – प्रोफेसर सतीश ख़ुराना, बुलंदी (1980)

ताक़त पर तमीज़ की लगाम जरूरी है. लेकिन इतनी नहीं कि बुज़दिली बन जाए. 
– राजेश्वर सिंह, सौदागर (1991)

हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते, हम आंखें ही चुरा लेते हैं.
 – ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह, तिरंगा (1992)

दुश्मन को जला कर रख देने वाले राजकुमार के कुछ डायलॉग


 राजकुमार के डायलॉग

राजकुमार की जिस मूवी में फाइटिंग सीन होते थे उसमें तो दुश्मन इतना भयंकर होता था इनका कुछ कहने को है| लेकिन दुश्मन से ज्यादा भयंकर बर्ताव तो इनका होता था आपको Tiranga फिल्म याद होगी, धांसू रोल थे उसमें| अपने जवाबों से दुश्मन की हालत करना कोई इनसे सीखे|

ये तो शेर की गुफा है. यहां पर अगर तुमने करवट भी ली तो समझो मौत को बुलावा दिया. 
– राणा, मरते दम तक (1987)

शेर की खाल पहनकर आज तक कोई आदमी शेर नहीं बन सका. और बहुत ही जल्द हम तुम्हारी ये शेर की खाल उतरवा लेंगे.
 – जगमोहन आज़ाद, पुलिस पब्लिक (1990)

औरों की ज़मीन खोदोगे तो उसमें से मट्टी और पत्थर मिलेंगे. और हमारी ज़मीन खोदोगे तो उसमें से हमारे दुश्मनों के सिर मिलेंगे.
– पृथ्वीराज, बेताज बादशाह (1994)

मिनिस्टर साहब, गरम पानी से घर नहीं जलाए जाते. हमारे इरादों से टकराओगे तो सर फोड़ लोगे. 
– जगमोहन आज़ाद, पुलिस पब्लिक (1990)

जो भारी न हो.. वो दुश्मनी ही क्या.
 – ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह, तिरंगा (1992)

इरादा पैदा करो, इरादा. इरादे से आसमान का चांद भीइंसान के कदमों में सजदा करता है.

– प्रोफेसर सतीश ख़ुराना, बुलंदी (1980)

क्यों है ना कमाल के डायलॉग्स?


आपको यह डायलॉग जरूर पसंद आए होंगे और आएंगे भी क्यों नहीं, आखिर इन्हें बोलने वाले राजकुमार थे दुनिया इन डायलॉग्स को याद करके मन ही मन खुश होती रहती है और यहां तक आम जिंदगी में इनका काफी इस्तेमाल होता है अपने दुश्मन को ट्रोल करके शर्म से बेइज्जत कर देने के लिए इसका इस्तेमाल जरूर करते हैं|


यह डायलॉग ऐसे हैं जो बुद्धिमत्ता का प्रतीक है यानी कि सिर्फ एक लाइन में बहुत बड़ा अर्थ छुपा हुआ है व्यक्ति आसानी से एक लाइन को पढ़ कर कहानी को मन में उतर सकता है की क्या स्थिति होगी जब यह डायलॉग कहा गया| यहां हमने कुछ को ही ही रखा है वैसे और भी न जाने कितने डायलॉग हैं जो बहुत ही विख्यात हैं|


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