मंगलवार, 3 जुलाई 2018


Allahabad: मुसलमानों ने खुद ही तोड़ी मस्जिदें| प्रयाग में कुंभ का मेला होने वाला है लेकिन वहां पर काफी समय से सड़कों के किनारे बहुत अधिक संख्या में अतिक्रमण कर कर मस्जिदे बना दी गई थी| ऐसा होता है कब्जा करने के लिए धार्मिक स्थलों का सहारा लिया जाता है यहां भी कुछ ऐसा ही था|
Allahabad: प्रयाग में तोड़ डाली गई मस्जिदें, मुसलमानों ने खुद ही तोड़ी मस्जिदें

Allahabad: प्रयाग में तोड़ डाली गई मस्जिदें, मुसलमानों ने खुद ही तोड़ी मस्जिदें


इससे कुंभ के होने वाले मेले में लोगों को समस्या काफी आनी थी क्योंकि मस्जिदें सरकारी जमीन को घेरकर बनी हुई थी जो सड़क पर ही थी| लेकिन यहां कुछ ऐसा हुआ जो आज तक किसी ने नहीं किया ज्यादातर हम कट्टरपंथ के वजह से यह देखते हैं ऐसी स्थिति में लोग मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं|

 देखने को तो आप को यह भी मिला होगा कि नमाज पढ़ने के नाम पर खाली सरकारी जमीनों पर सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कब्ज़ा करके मस्जिद बना डाली| और अब वहां धड़ल्ले से उनका काम चल रहा है|

ANI न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक

 मस्जिदों के क्षेत्रीय मुसलमानों ने स्वयं ही अपने विचार से उन मस्जिदों के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया जो सरकारी जमीन पर थे| कुंभ के मेले में सड़क का क्षेत्रफल खाली चाहिए था जिन पर अवैद्य मस्जिदों का कब्जा था इसलिए मुसलमानों ने ऐसा कदम उठाया क्षेत्रीय मुस्लिम समाज के लोगों ने बताया कि हमने अपनी इच्छा पर है ऐसा किया है इन मस्जिदों को सरकारी भूमि पर बनाया गया था इसलिए हमने इसे स्वयं तोड़ दिया सरकार कुंभ के मेले से पहले सड़क को चौड़ा कर रही है और हम इस फैसले का समर्थन करते हैं|

इसीलिए यहां के क्षेत्रीय मुसलमानों ने मस्जिदों की उन हिस्सों को तोड़ दिया जो सरकारी जमीन पर आ रहे थे|

क्या मजहब की मानसिकता की शर्मिंदगी से मस्जिदे तोड़ी गई

 इलाहाबाद में मुस्लिमों द्वारा मस्जिदें तोड़े जाने पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही है हालांकि हो कुछ भी लेकिन मस्जिद तो वैसे भी हटाना ही था क्योंकि वह अवैध थी|

 परंतु उन्हें मुसलमानों के द्वारा ही तोड़ दिए जाने पर कई सारी बातें बनी, लोगों को लग रहा है कि मुसलमान मस्जिद इसलिए तोड़े रहे हैं क्योंकि वह अपने मजहब के लोगों द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद और बलात्कार जैसा अपराध किए जाने और फिर उन अपराधियों का मुस्लिम समुदाय द्वारा समर्थन किए जाने पर शर्मिंदा है  पर ऐसा कुछ भी नहीं है उन्हें किसी भी प्रकार की शर्मिंदगी नहीं आ रही है जो उसकी वजह से यह मस्जिद तोड़ रहे हो मस्जिद तोड़ना जरूरी था क्योंकि वह अवैध थी| 


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